रायगढ़। पिछले पंद्रह दिनों से रायगढ़ से तमनार की दिशा में आसमान में एक छोटा, 10 से 20 सीटर विमान लगातार दिखाई दे रहा है। यह कोई सामान्य उड़ान नहीं लगती—न तय समय, न स्पष्ट मार्ग और न ही इसकी गतिविधियों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी। नतीजा यह कि ग्रामीणों से लेकर शहरी आबादी तक, हर कोई इस “उड़ते रहस्य” को लेकर चर्चा में डूबा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह विमान रोज़ाना लगभग एक ही रूट पर आता-जाता दिखता है, लेकिन सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जिंदल प्लांट के आसपास यह बेहद कम ऊंचाई पर चक्कर लगाता है। कई बार तो इसकी उड़ान इतनी नीचे होती है कि उसकी आवाज़ और आकृति दोनों साफ महसूस किए जा सकते हैं। खेतों में काम कर रहे किसानों से लेकर घरों की छतों पर बैठे बुजुर्ग—हर किसी की नजर अब आसमान पर टिकने लगी है।
तमनार और आसपास के गांवों में इसको लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कोई इसे किसी बड़े औद्योगिक सर्वे से जोड़ रहा है, तो कुछ लोग सुरक्षा या खनन से संबंधित गतिविधियों का अंदेशा जता रहे हैं। वहीं कुछ बुजुर्ग इसे “पुराने जमाने के हवाई सर्वे” की तरह देख रहे हैं, जब जमीन और संसाधनों का आंकलन आसमान से किया जाता था।
हालांकि, अब तक प्रशासन या संबंधित कंपनियों की ओर से इस पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। न तो नागरिक उड्डयन विभाग ने कोई जानकारी साझा की है, और न ही स्थानीय प्रशासन ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि की है कि आखिर यह विमान किस उद्देश्य से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय है।
विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह की उड़ानें अक्सर जियो-मैपिंग, खनिज सर्वेक्षण या इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग के तहत की जाती हैं। छोटे विमान या चार्टर्ड प्लेन को कम ऊंचाई पर उड़ाकर विस्तृत डेटा एकत्र किया जाता है। लेकिन जब तक इस पर आधिकारिक मुहर नहीं लगती, तब तक यह सब केवल अनुमान ही रहेगा।
फिलहाल, रायगढ़-तमनार का आसमान सिर्फ उड़ानों का रास्ता नहीं, बल्कि सवालों का मैदान बन चुका है। हर दिन जब यह विमान फिर से मंडराता है, तो लोगों की जिज्ञासा भी उतनी ही ऊंचाई पकड़ लेती है—शायद किसी दिन इसका जवाब भी उसी आसमान से उतरकर सामने आए।

