रायगढ़। ग्राम गेरवानी में प्रस्तावित मेसर्स शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड की इस्पात परियोजना अब गंभीर कानूनी विवाद के केंद्र में आ गई है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित पर्यावरण जनसुनवाई को लेकर आपत्तियों का सिलसिला तेज हो गया है। अधिसूचना के अनुसार परियोजना में स्पंज आयरन, कैप्टिव पावर प्लांट, फेरो एलॉय, ब्रिकेटिंग यूनिट एवं फ्लाई ऐश ब्रिक निर्माण जैसी उच्च प्रदूषणकारी इकाइयों का समावेश है।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सूरज कुमार यादव ने इस प्रस्तावित जनसुनवाई को “पूर्वनियोजित औपचारिकता” बताते हुए आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना 2006 के मूल प्रावधानों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। उनका कहना है कि परियोजना के पर्यावरण प्रभाव आकलन में संभावित जोखिमों – विशेषकर वायु गुणवत्ता, भूजल प्रदूषण और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन – को जानबूझकर कमतर आंककर प्रस्तुत किया गया है, जो विधिक दृष्टि से भ्रामक एवं दंडनीय है।
यादव ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में पूर्व स्थापित औद्योगिक इकाइयों में घटित लगातार दुर्घटनाएं स्पष्ट रूप से यह सिद्ध करती हैं कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में नए प्रोजेक्ट को स्वीकृति देना न केवल “नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों” का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन के अधिकार – भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 – का हनन भी है।
पर्यावरण विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विभाग की निष्क्रियता “संवैधानिक कर्तव्यों के उल्लंघन” की श्रेणी में आती है। यदि जनसुनवाई प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनसहमति सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह पूरी कार्यवाही न्यायिक समीक्षा के दायरे में लाई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जनविरोध के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी, और इसके लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा।

