महाजेंको की गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल माइंस से कोयले का प्रथम डिस्पैच शुरू छत्तीसगढ़ से महाराष्ट्र तक पहुंचेगा कोयला, राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मिला नया आधार*

By Anuj Gupta - EDITOR IN CHIEF
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अनुज गुप्ता की रिपोर्ट



तमनार | 09 अप्रैल 2026छत्तीसगढ़ अब देश के औद्योगिक और ऊर्जा उत्पादन परिदृश्य में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। रायगढ़ जिले में स्थित गारे पेलमा सेक्टर–2 (GP2) कोल माइंस से आज कोयले का प्रथम डिस्पैच औपचारिक रूप से शुरू हुआ, जिसके साथ ही छत्तीसगढ़ का कोयला अब सीधे महाराष्ट्र में विद्युत उत्पादन को समर्थन देगा। यह पहल दोनों राज्यों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने के साथ‑साथ देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।





गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल ब्लॉक महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (MAHAGENCO) के लिए विकसित किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र में विद्युत उत्पादन की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है। इस परियोजना के माध्यम से महाराष्ट्र की ताप विद्युत परियोजनाओं को छत्तीसगढ़ से सुनिश्चित और स्थिर ईंधन आपूर्ति प्राप्त होगी, जिससे बिजली उत्पादन की निरंतरता और विश्वसनीयता को मजबूती मिलेगी।



गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल माइंस में लगभग 655.15 मिलियन टन कोयला भंडार उपलब्ध है। इसकी अधिकतम वार्षिक उत्पादन क्षमता 23.6 मिलियन टन (MTPA) निर्धारित की गई है। परियोजना के पूर्ण संचालन से छत्तीसगढ़ राज्य को रॉयल्टी, जिला खनिज निधि (DMF), वस्तु एवं सेवा कर (GST) तथा अन्य मदों के माध्यम से लगभग 29,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।



खनन गतिविधियों से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। परियोजना के तहत 3,400 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे, वहीं परिवहन, निर्माण, खानपान, सुरक्षा, ठेकेदारी और अन्य सहायक सेवाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय गति मिलेगी।





स्थानीय विकास को प्राथमिकता देते हुए परियोजना क्षेत्र में सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत कार्य किए जा रहे हैं। लगभग 35 करोड़ रुपये की प्रारंभिक CSR योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, आधारभूत संरचना और कौशल विकास से जुड़े कार्य शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही संचालन अवधि के दौरान परियोजना के शुद्ध लाभ का 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष स्थानीय विकास कार्यों में निवेश किया जाएगा। परियोजना से प्रभावित 14 गांवों के 1,679 परिवारों के लिए पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना भी प्रभावी रूप से लागू की जा रही है।



पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी परियोजना में विशेष ध्यान दिया गया है। एक व्यापक पर्यावरण प्रबंधन योजना के अंतर्गत हरित पट्टी का विकास, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण उपाय, जल संरक्षण तथा खनन के पश्चात भूमि सुधार जैसे कार्यों को प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखा जा सके।



इस अवसर पर परियोजना प्रमुख ने कहा कि गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल माइंस से पहला डिस्पैच परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को समर्थन मिलेगा, बल्कि रायगढ़ क्षेत्र में रोजगार सृजन और सामाजिक विकास की प्रक्रिया भी तेज होगी। वहीं CSR टीम के प्रतिनिधि ने कहा कि स्थानीय समुदाय इस विकास मॉडल का अभिन्न हिस्सा है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों को आने वाले समय में और विस्तार दिया जाएगा।





कुल मिलाकर, गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल माइंस से कोयले के प्रथम उत्पादन और डिस्पैच की शुरुआत छत्तीसगढ़ को देश के ऊर्जा उत्पादन मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाती है। यह परियोजना एक ओर महाराष्ट्र की विद्युत उत्पादन व्यवस्था को ईंधन सुरक्षा प्रदान करेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचागत विकास को नई दिशा देगी।

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