जिंदल की गारे-पेलमा सेक्टर-1 जनसुनवाई महज 2 घंटे में समाप्त प्रभावित 14 गांव के लोगों का कहना है जनसुनवाई फर्जी है मास्टर माइंड कौन*जिंदल के अधिकारी राजेश दुबे पर गंभीर आरोप






रायगढ़/तमनार।गारे-पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक में जिंदल पावर लिमिटेड की प्रस्तावित 8 दिसंबर 2025 की जनसुनवाई को लेकर तमनार अंचल के 14 गांवों के हजारों ग्रामीण ऐतिहासिक विरोध अहिंसात्मक रूप से दर्ज किए। तेज़ ठंड को मात देते हुए ग्रामीण धौराभाठा मैदान में रात-भर जाग कर 5 दिसंबर से आंदोलन कर थे,और ग्रामीणों ने साफ कहा है कि—इस बार हमारे क्षेत्र में जनसुनवाई का टेंट तक नहीं लगने देंगे।ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में वर्षों से संचालित खदानों के कारण विस्थापन, पर्यावरणीय क्षति और रोजगार संकट पहले से बढ़ चुका है। यदि जिंदल को नया खदान क्षेत्र में मिलता है तो आसपास के 15–20 गांव गंभीर रूप से प्रभावित हो जाएंगे। उसके बाद भी 14 गांव के प्रभावित लोगों को पता नहीं चला कि जनसुनवाई तो हो गई है पर कैसे ओर किसने किया जब पता चला कि जिंदल की जनसुनवाई लगभग 1 से 2 घंटे में ही बलपूर्वक करा लिया गया है। तब लोगों ने आवाज उठाना शुरू किया पर जिस जगह में जनसुनवाई हुई वहां किसी को अंदर जाने नहीं दिया गया। लोगों का कहना है कि जिंदल की जनसुनवाई फर्जी है जो वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रही है उसमें साफ दिख रहा है की जनसुनवाई में समर्थन और विरोध करने वाले लोग माईक में बोल रहे हैं कि मैं समर्थन करता हूं और विरोध करता हूं उस छोटे से साउंड सिस्टम में पिटासीन अधिकारी को ही उनके नाम सुनाई नहीं दे रहे थे तो 14 गांव के लोग को कैसे पता चलता की जनसुनवाई यहां हो रही है पूरी तरीके से पर्यावरण अधिकारी मास्टर स्ट्रोक के साथ यह जनसुनवाई को करा कर शासन की फॉर्मेलिटी पूरी कर ली गई वो भी गोपनीय तरीके से ।इतनी बड़ी कोयला खदान की जनसुनवाई जिसमें 14 गांव के हजारों भू स्वामी और परिवार प्रभावित हो रहे हैं जिसकी जनसुनवाई महज 2 घंटे में समाप्त हो गई आखिर कारण क्या है जो इस तरीके से जनसुनवाई को सफल बताया जा रहा है आज तक इतिहास में कहीं भी ऐसी जनसुनवाई ना देखी गई है ना सुनी गई है पूरे क्षेत्र में 14 गांव के लोग में आक्रोश व्याप्त है कि आखिर कैसे जनसुनवाई कराई गई और कौन है इसका मास्टर माइंड।
प्रभावितों ने कहा नियम विरुद्ध हुआ है जनसुनवाई तत्काल निरस्त हो जनसुनवाई
ग्रामीणों ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 14 सितंबर 2006 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना का भी उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट है कि प्रभावित ग्रामों को सही सूचना देना अनिवार्य,स्वतंत्र और निष्पक्ष जनसुनवाई,धमकियों या दबाव से मुक्त वातावरण,जनभागीदारी के अधिकार की रक्षा,तभी जनसुनवाई वैध मानी जाती है,लेकिन प्रशासन का रवैया बिल्कुल विपरीत देखा गया है। लोगों को पता नहीं चला कि जनसुनवाई कैसे हो गई।इसको लेकर आक्रोश व्याप्त है जिंदल की जनसुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर दिनांक 12 दिसम्बर 2025 से 14 गांव के प्रभावित लोग सी एच पी चौक लिबरा में अनिश्चित कालीन आर्थिक नाकेबंदी करने का निर्णय लिए हैं और ग्रामीणों का कहना है जब तक जनसुनवाई निरस्त नहीं होती तब तक यह आंदोलन अहिंसात्मक रूप से जारी रहेगी।
*अनुज गुप्ता के साथ सहयोगी सुमित श्रीवास की रिपोर्ट*

